दहलीज मेरे मन की
Tuesday, May 5, 2009
कुछ कहना चाहेंगे...
2 comments:
नदीम अख़्तर
July 10, 2009 at 12:22 PM
कहां हो सौरव बाबू। इतना इतना दिन तक दिखाई नहीं दोगी, तो ठीक नहीं होगा।
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कडुवासच
July 22, 2009 at 5:44 AM
...bahut khoob !!!
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अनुराग से करें जिरह
इतना भी बुरा नहीं यह वक्त, जितना सब कोसते हैं
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वक्त की दहलीज
दहलीज पर आपका नंबर
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Shrikant Dubey
dahleez
sunil choudhary
कहां हो सौरव बाबू। इतना इतना दिन तक दिखाई नहीं दोगी, तो ठीक नहीं होगा।
ReplyDelete...bahut khoob !!!
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