
हम अपने घरों में अपने बच्चों को इनके बारे में बताएं। सरकार भले ही इनके संरक्षण के िलए पिरयोजनाएं बनाती है पर उससे अाम लोगों की भागीदारी सुिनश्चत नहीं हो पाती। अाम लोगों को भी जागरूक होना होगा। पशु-पिक्षयों के संगरक्षण का ठेका लेने वाले एनजीओ को धरातल पर काम करना होगा। यह तभी संभव है जब अापके िदल में इन जानवरों के पऱित पऱेम हो। अाप इनसे उसी पऱकार प्यार करें जैसा अपने बच्चों और अन्य िपऱयजनों से करते हैं। घरों में सास-बहु सीिरयलों की कुिटस सास और बहुओं की चतुरचालों की चचाॆ के बदले इन जानवरों की चचाॆ करें। िजस िदन अाम लोगों के घरों में जानवरों के बारे में चचाॆ शुरू हो जाएगी उस िदन वाकई हम जागरूक हो जाएंगे। और नहीं तो तैयार रहें हम अपने बच्चों से कहेंगे.. देखो बेटा ये शेर एेसा होता था। उसके चार पैर होते थे, फलां, फलां...
इसिलए मैं िफर कहता हूं अाप कुछ न करें िसफॆ इनके प्यार करें, इनके बारे में सोचें, तो हो सकता है एक िदन अाप जंगल के इस राजा के काम अा जाएं। इनके नाखूनों, खाल और हिड्डयों से बननेवाले पदाथोॆं का कारोबार करनेवाले और इनके िशकािरयों के िखलाफ खड़े हो जाएं।